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थियोसोफिकल सोसायटी

थियोसोफिकल सोसायटी

थियोसोफिकल सोसायटी (Theosophical Society)

सन 1875 ई. में थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयार्क में मैडम एच.पी.ब्लावस्की और कर्नल एच.एस.ऑलकॉट ने की थी।

सन 1879 ई. में यह भारत आए तथा मद्रास के पास अडियार में सोसायटी का मुख्यालय सन 1888 ई. में स्थापित कर दिया।

आयरलैण्ड की निवासी श्रीमती एनी बेसेण्ट के भारत आने पर यह थियोसोफिकल आन्दोलन शीघ्र ही सारे भारत में पनप गया।

इन्होंने आत्मा के पुनर्जन्म के सिद्धांत को माना, धार्मिक पुनर्जागरणवादियों के रूप में थियोसोफिस्ट अधिक सफल नहीं रहे।

परन्तु आधुनिक भारत की गतिविधियों में उन्होंने एक अनोखा योगदान दिया।

एनी बेसेण्ट 1898 ई. में बनारस के सेन्ट्रल हिन्दू स्कूल की स्थापना के साथ-साथ महिलाओं एवं दलित वर्गों के लिए विद्यालय खोले तथा बाल-विवाह, जाति-प्रथा का पुरजोर विरोध किया।

इस आन्दोलन की विशेषता यह रही कि इसका नेतृत्त्व पश्चिम के निवासियों ने किया जिन्होंने भारतीय धर्मों तथा दार्शनिक परम्परा का गुणगान किया, इससे भारतवासियों को अपना आत्म विश्वास फिर से प्राप्त करने में सहायता मिली।

इसकी स्थापना का उद्देश्य विश्व बंधुत्व तथा सांस्कृतिक विकास को प्रोत्साहित करना व प्राच्य धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन करना था।

आर्य समाज

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