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भारत की भौगोलिक विविधता

भारत की भौगोलिक विविधता | अध्याय 1 | कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान

अध्याय 1

Table of Contents

भारत की भौगोलिक विविधता

महत्त्वपूर्ण प्रश्न

उत्तर – भारत की प्रमुख भौगोलिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. एशिया महाद्वीप में स्थित भारत क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है।

2. भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ मिलकर एक बड़े भू-भाग का निर्माण करता है, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप के नाम से जाना जाता है।

3. भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत श्रृंखला, पश्चिम में थार का मरुस्थल और अरब सागर, दक्षिण में हिन्द महासागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी प्राकृतिक सीमा के रूप में उपस्थित है।

उत्तर – भारत में हिमालय की ऊँची पर्वत श्रृंखला, उत्तरी मैदानों की उपजाऊ भूमि, दक्कन का पठार, थार का मरुस्थल, तटीय क्षेत्र, द्वीप समूह आदि सब मिलकर एक अद्वितीय भौगोलिक स्वरूप बनाते हैं। इन विविधताओं का हमारे जीवन पर अग्र प्रभाव पड़ता है –

  • जलवायु पर प्रभाव – हिमालय ठंडी हवाओं को रोकता है और मानसूनी वर्षा को प्रभावित करता है।
  • कृषि पर प्रभाव – उत्तरी मैदानों की उपजाऊ भूमि में कृषि फलती-फूलती है, जबकि मरुस्थल और पर्वतीय क्षेत्रों में सीमित कृषि होती है।
  • आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव – पठारी क्षेत्रों में खनन, तटीय भागों में मत्स्य उद्योग और मैदानों में कृषि प्रमुख होती है।
  • जल की उपलब्धता पर प्रभाव – भारत में गंगा के मैदान, पठारी क्षेत्र एवं तटीय क्षेत्रों में जल प्रर्याप्त मात्रा में उपस्थित है, परन्तु मरुस्थलीय क्षेत्रों में जलाभाव के कारण लोगों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को प्रायः अपने परिवार के लिए जल लाने हेतु प्रतिदिन लम्बी दूरी तय करणी पड़ती है।

उत्तर – जी हाँ, हमें अक्षांश और देशांतर रेखाओं पर अपना पाठ याद है।

भारत उत्तर – पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित है।

भारत 804’ उत्तरी अक्षांश से 3706’ उत्तरी अक्षांश तथा

6807’ पूर्वी देशांतर से 97025’ पूर्वी देशांतर रेखाओं के मध्य स्थित है।

उत्तर – भारत के मानचित्र को देखते हुए विशेषताओं की पहचान स्वयं करेंगे। नीचे दिए गए विडियो में ध्यान से समझेंगे।

उत्तर – भारतीय हिमालयी क्षेत्र 13 भारतीय राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों में फैला हुआ है।

जो निम्नलिखित है – जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल।

उत्तर – मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा ज्यादा होता है

तथा विस्तृत परिवहन तंत्र, इमारतों व अन्य निर्माण सामग्रियों की अधिकता के

कारण वहाँ सूर्य की गर्मी अवशोषित होती है और प्रकाश का संकेन्द्रण होता है।

उत्तर – पर्वत कठोर चट्टानों से बने होते हैं इसलिए उनका आकार स्थिर रहता है।

रेत के टीले रेत से बने होते हुए भी एक जैसे आकार में दिखाते हैं

क्योंकि हवा रेत को उड़ाकर एक जगह जमा करती है, जिससे टीला बनता है।

रेत एक सीमा तक ही टिकती है, उससे ज्यादा होने पर नीचे फिसल जाती है।

इस कारण टीले का आकार अपने आप संतुलित होकर एक जैसा बना रहता है।

हालाँकि, टीले धीरे-धीरे हवा के साथ बदलते भी रहते हैं, लेकिन यह बदलाव बहुत धीमा होता है।

इसलिए रेत के टीले भी हमें स्थिर आकार वाले दिखाई देते हैं, भाले ही वे ढीली रेत से बने हों।

उत्तर – हाँ, अरावली पर्वत श्रृंखला दिल्ली से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान होते हुए गुजरात तक जाती है,

इसलिए ये चारों राज्य इसमें शामिल हैं।

उत्तर – बंगाल की खाड़ी की ओर बहने वाली पाँच नदियाँ –

(1) गोदावरी, (2) महानदी, (3) कृष्णा, (4) कावेरी व (5) स्वर्ण रेखा नदी।

भारत के तटीय राज्य – गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल।

भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदानों के मध्य प्रमुख अन्तर –

  • पश्चिमी तटीय मैदान गुजरात से लेकर केरल तक अरब सागर के किनारे तथा पूर्वी तटीय मैदान गंगा के डेल्टा से लेकर कन्याकुमारी तक बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित हैं।
  • पश्चिमी तटीय मैदान की नदियाँ (जैसे – नर्मदा, ताप्ती) छोटी हैं और सीधे अरब सागर में गिरती हैं, जबकि पूर्वी तटीय मैदान की नदियाँ (जैसे – गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी) बड़ी हैं और डेल्टा बनाती हैं।
  • पश्चिमी तटीय मैदान में संकरी खाड़ियाँ और एस्चुरी पाई जाती हैं, जबकि पूर्वी तटीय मैदानों में विस्तृत मैदान और उपजाऊ डेल्टा पाए जाते है।

उत्तर – जब नदियाँ तटों के निकट अनेक धाराओं में विभाजित हो जाती हैं,

तो इस प्रकिया को ‘वितरिका’ कहते हैं तथा इस भू-भाग को ‘डेल्टा’ कहा जाता है।

उत्तर – भारत एक विशाल और विविधता वाला देश है, जिसमें अनेक भौगोलिक विशेषताएँ हैं।

इनमें से दो सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएँ इस प्रकार हैं –

(1) हिमालय पर्वत श्रृंखला – हिमालय भारत के उत्तर में एक विशाल प्राकृतिक प्राचीर के रूप में स्थित है। यह ठंडी हवाओं को भारत में प्रवेश करने से रोकता है और मानसूनी वर्षा को प्रभावित करता है। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ (गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र) करोड़ों लोगों को जल, उपजाऊ मिट्टी और जीवन देती हैं, इसलिए हिमालय को ‘एशिया का जल-शिखर’ भी कहा जाता है।

(2) गंगा का मैदान (उत्तरी मैदान) – हिमालय से निकलने वाली नदियाँ इस मैदानी क्षेत्र की मिट्टी को खनिजों से समृद्ध बनाती है। यह भूमि अत्यंत उपजाऊ और समतल है, जिसके कारण यहाँ प्रचुर मात्रा में कृषि संभव होती है और व्यापार भी सुगम है।

उपर्युक्त दोनों विशेषताएँ इसलिए महत्वूर्ण हैं, क्योंकि इन्होंने देश की जलवायु, कृषि, जीवनशैली और सस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है तथा हमारी सभ्यता को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उत्तर – यदि उत्तर में हिमालय नहीं होता तो उत्तर दिशा से आने वाली ठंडी हवाएँ

पुरे भारत में फैल जाती और जलवायु अत्यधिक ठंडी हो जाती।

मानसूनी हवाएँ बिना रुके उत्तर की ओर निकल जाती, जिससे वर्षा बहुत कम होती

और देश के अधिकांश भाग शुष्क व मरुस्थलीय बन जाते।

हिमालय से निकलने वाली नदियाँ (गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र आदि) अस्तित्व में न होती,

जिससे कृषि और जीवन कठिन हो जाता।

हिमालय ने न केवल भारत की जलवायु, नदियों और कृषि को आकार दिया है,

बल्कि यह देश की सभ्यता और संस्कृति की रक्षा करने वाली प्राकृतिक दीवार भी है।

अतः स्पष्ट है की यदि हिमालय न होता तो

भारत की जलवायु, कृषि, जलस्रोत, प्राकृतिक सुंदरता और सभ्यता का स्वरूप पूर्णतः बदल जाता।

उत्तर – भारत को ‘लघु महाद्वीप’निम्नलिखित कारणों से कहा जाता है –

(1) विस्तार और विविधता – भारत का भू-भाग बहुत विशाल है और इसमें पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र, द्वीप आदि सभी प्रकार की भौगोलिक विशेषताएँ पाई जाती हैं।

(2) प्राकृतिक सीमाएँ – उत्तर में हिमालय, पश्चिम में थार का मरुस्थल व अरब सागर, दक्षिण में हिन्द महासागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी भारत को एक स्वतंत्र भौगोलिक इकाई बनाते हैं।

(3) सांस्कृतिक और भौतिक भिन्नता – यहाँ जलवायु, मिट्टी, वनस्पति, भाषा, संस्कृति और जीवनशैली में अत्यधिक विविधता है।

(4) स्वतंत्र और भौगोलिक पहचान – अपनी भौगोलिक रचना, प्राकृतिक सीमाओं और विविध संसाधनों के कारण भारत का स्वरूप एक ‘छोटे महाद्वीप’ जैसा है।

उत्तर – हम गंगा नदी को मानचित्र में देखते है

तो हम पाते है कि गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गौमुख के निकट गंगोत्री हिमनद से होता है।

यह नदी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर बंगाल की खाड़ी में अपना जल गिराती है।

गंगा नदी के पानी के उपयोग के तरीके –

  • यह पश्चिम बंगाल में दूसरी नदियों के साथ मिलकर डेल्टा का निर्माण करती है। यह सुंदरबन में पेड़-पौधों और जीवों को जल प्रदान करती है।
  • उत्तराखंड में, गंगा नदी का पानी जल-विद्युत उत्पादन में प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही यहाँ पर्यटकों के लिए गंगोत्री तथा हरिद्वार जैसे पवित्र स्थान हैं।
  • बिहार तथा उत्तर प्रदेश में गंगा नदी का पानी मत्स्य पालन तथा सिंचाई हेतु प्रयोग किया जाता है। वाराणसी और प्रयागराज जैसे बड़े धार्मिक शहर इसके किनारों पर बसे हैं।

उत्तर – भारत के दक्षिणी भाग को प्रायद्वीपीय पठार इसलिए कहा जाता है,

क्योंकि यह तीन ओर से – अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिन्द महासागर द्वारा जल से घिरा हुआ है।

उत्तर – इस अध्याय में वर्णित यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त धरोहर स्थल हैं –

ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान, जैसलमेर का किला, पश्चिमी घाट और सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान।

उपर्युक्त सभी धरोहर स्थल मुझे रुचिकर लगे, जिनके रोचक तथ्यों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है –

ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान – हिमाचल प्रदेश में अवस्थित इस राष्ट्रीय उद्यान में वनस्पतियों और जीवों की अत्यधिक विविधता पाई जाती है। यहाँ की जैव विविधता को सरकार के साथ-साथ उद्यान में रहने वाले ग्रामीण समुदायों द्वारा भी संरक्षित किया जाता है।

जैसलमेर का किला – राजस्थान में स्थित यह किला पीले बलुआ पत्थरों से निर्मित है,

जिसके कारण यह सूरज की रोशनी में पिला दिखाई देता है।

पश्चिमी घाट – पश्चिमी घाट जैव विविधता से परिपूर्ण है तथा यहाँ अनेक नदियाँ प्रवाहित होती हैं।

पश्चिमी घाट के उत्तरी भाग को सह्याद्रि पहाडियों के नाम से जाना जाता है।

सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान – पश्चिम बंगाल राज्य में अवस्थित

सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान में विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन पाया जाता है

तथा यह रॉयल बंगाल टाइगर सहित अनेक दुर्लभ जीवों का आवास स्थल है।

उत्तर – मैं राजस्थान राज्य के नागौर जिले में निवास करता हूँ।

इस स्थान का वर्णन करने के लिए भारत की भौतिक विशेषता ‘विशाल भारतीय मरुस्थल या थार का मरुस्थल’ का प्रयोग कर सकते हैं। थार मरुस्थल की परिस्थितियों के अनुरूप ही यहाँ भी दिन के समय अत्यधिक तापमान होता है और रातें ठंडी होती हैं।

जल के अभाव के कारण कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नागौर जिले के कई क्षेत्रों में जल की प्राप्ति हेतु महिलाओं को प्रतिदिन लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

उत्तर – भारत में जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार खाद्य संरक्षण के विभिन्न स्थानीय उपाय अपनाए जाते हैं।

ये तरीके प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकताओं और वातावरण पर निर्भर करते हैं तथा

लोगों के जीवन को सरल और संतुलित बनाते हैं।

स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खाद्य संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं –

  • सुखाकर रखना – पहाड़ी और शुष्क क्षेत्रों में मौसमी सब्जियाँ; जैसे – मेथी, पालक, मटर, सांगरी, काचरी, टीन्सी, गवार फली आदि को सुखाकर सुरक्षित रखा जाता है ताकि उन्हें अन्य ऋतुओं में भी उपयोग किया जा सके।
  • अचार बनाना – राजस्थान, गुजरात और उत्तर भारत में फलों और सब्जियों को तेल, नमक और मसलों में डालकर अचार बनाया जाता है। यह लम्बे समय तक सुरक्षित रहता है।
  • अन्न का भण्डारण – ग्रामीण क्षेत्रों में अन्न को मिट्टी के बर्तनों या कोठियों में संगृहित किया जाता है ताकि नमी और कीड़ों से बचाया जा सके।
  • अन्य स्थानीय तरीके – तटीय क्षेत्रों में मछली और नारियल को सुखाकर रखा जाता है तथा पर्वतीय क्षेत्रों में दूध से घी, मक्खन और चीज बनाकर सुरक्षित किया जाता है।

उत्तर – भारत एक विस्तृत और विविध भौगोलिक स्वरूप वाला देश है,

जहाँ पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र, द्वीप आदि सभी प्रकार की भौगोलिक विशेषताएँ पाई जाती हैं

फिर भी इन विविधताओं के बावजूत लोग एकजुट हैं।

  • भारत के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में जलवायु, भाषा, भोजन और पहनावा भले ही अलग हैं, लेकिन इन विविधताओं ने देश की संस्कृति को समृद्ध और एकजुट बनाया है।
  • नदियाँ, मैदान और पर्वत सभी भारतीयों के जीवन का हिस्सा हैं तथा इनसे प्राप्त जल, अन्न और खनिज संसाधनों ने लोगों को परस्पर निर्भर बनाया है।
  • मैदानों और तटीय क्षेत्रों ने व्यापार, परिवहन और संवाद को बढ़ावा दिया है, जिससे भारत के अलग-अलग भागों के लोग एक-दूसरे से जुड़े रहे।
  • हिमालय उत्तर की सीमा की रक्षा करता है, नदियाँ देश को जोड़ती हैं और सागर भारत को विश्व से सम्पर्क कराता है। ये सब भारत को एक एकीकृत भौगोलिक इकाई बनाते हैं।
Q. भारत की भौगोलिक विविधता क्या है?

उत्तर: भारत में विभिन्न प्रकार की भूमि, जलवायु, वनस्पति और जीव-जंतुओं की उपस्थिति को भौगोलिक विविधता कहा जाता है।

Q. भारत के प्रमुख भौगोलिक भाग कौन-कौन से हैं?

उत्तर: भारत के प्रमुख भौगोलिक भाग हैं—हिमालय पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र और द्वीप समूह।

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