मौसम को समझना अध्याय 2 | कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान | सभी प्रश्नों के हल
इस पोस्ट में मौसम को समझना अध्याय 2 के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल और सटीक उत्तर दिए गए हैं, जो परीक्षा की दृष्टि से बेहद उपयोगी हैं। यहाँ आपको प्रत्येक प्रश्न का हल आसान भाषा में मिलेगा, जिससे आपकी तैयारी मजबूत होगी और आप परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।
अध्याय 2
मौसम को समझना
पाठगत महत्वपूर्ण प्रश्न :
Table of Contents
प्रश्न 1. हम अपने आस-पास के मौसम का आकलन एवं निरिक्षण किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर – हम अपने आस-पास के मौसम का आकलन एवं निरिक्षण मौसम के तत्त्वों के अध्ययन से कर सकते हैं, अर्थात् तापमान, वर्षा, आर्द्रता, वायुदाब और पवन जैसे तत्त्वों को देखकर और मापकर मौसम का आकलन किया जा सकता है; जैसे – मौसम गर्म या ठंठा है अथवा शुष्क है या वर्षामय।
प्रश्न 2. भारी वर्षा, तूफान, सुखा और ताप लहर (हीट वेव) जैसी घटनाओं के लिए तैयार रहने में मौसम की भविष्यवाणियाँ किस प्रकार हमारी सहायता करती हैं?
उत्तर – मौसम का सटीक पूर्वानुमान हमें ऐसी घटनाओं के लिए तैयार रहने में सहायता करता है। पूर्वानुमान स्थानीय सरकारों को संसाधन जुटाने और किसी भी आपदा के लिए तैयार रहने में सक्षम बनाता है। उदाहरण के लिए, यदि समुद्र में तूफानी मौसम की आशंका है तो मछुआरों को अपनी नावें बाहर निकालने की चेतावनी दी जाती है या चक्रवात की आशंका होने पर पूरे तटीय क्षेत्र को खाली कराया जा सकता है। अतः स्पष्ट है कि मौसम की भविष्यवाणियाँ हमें भारी वर्षा, तूफान, सुखा और ताप लहर जैसी आपदाओं से पूर्व तैयारी करने और जन-संपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करती हैं।
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प्रश्न : आप अपनी स्थानीय भाषा में मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग करते हैं? हॉट, कोल्ड, वॉर्म, चिली, क्रिस्प, प्लेजेंट आदि सामान्यतः अंग्रेजी भाषा में उपयोग किए जाने वाले शब्द हैं।
उत्तर – हम अपनी स्थानीय भाषा में मौसम का वर्णन करने के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं; जैसे – गर्म, ठण्डा, बारिश, उमस, ठंडी हवा वाला या सुखद मौसम आदि।
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प्रश्न : आपके अनुसार मौसम के अधिक सटीक आकलन के क्या लाभ हो सकते हैं? (संकेत : कुछ घंटे अथवा कुछ दिन पहले मौसम के विषय में पूर्व जानकारी आपको कुछ गतिविधियों की योजना बनाने में किस प्रकार सहायता करेगी?)
उत्तर – मौसम का अधिक सटीक आकलन हमें आने वाले कुछ घंटे या दिनों की मौसम संबंधी जानकारी पहले से प्रदान करता है। इससे हम अपनी दैनिक और विशेष गतिविधियों; जैसे – यात्रा, कृषि कार्य, विद्यालय या कार्यक्रमों की योजना सही ढंग से बना सकते हैं। साथ ही वर्षा, तूफान या अत्यधिक ताप जैसी परिस्थितियों के प्रति पहले से सतर्क रहकर हानि से बचा जा सकता है।
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प्रश्न : अपने आस-पड़ोस के बुजुर्गों से बात कीजिए और उनसे पूछिए कि वे मौसम का पुर्वानुमान कैसे लगाते हैं। वे किन संकेतकों का अवलोकन करते हैं? अपनी क्षेत्रीय भाषा में प्रचलित कुछ कहावतें, जो मौसम के पुर्वानुमान से संबंधित हों, उन्हें लिखिए।
उत्तर – बुजुर्ग लोग प्रकृति के संकेतों से मौसम का पुर्वानुमान लगाते हैं। वे पक्षियों की उड़ान, चींटियों के व्यवहार, मेंढकों की आवाज, गिलहरियों की गतिविधियों तथा पेड़-पौधों के परिवर्तनों को देखकर आने वाले मौसम का अनुमान लगाते हैं। इन संकेतों के आधार पर निम्न कहावतें भी प्रचलित हैं, जो वर्षा या तूफान की संभावना बताती हैं –
- काली घटा छाई, समझो वर्षा आई।
- चींटी अंडा ले जाए, बारिश जल्दी आए।
- सूरज ढले लालिमा छाए, अगले दिन पानी बरस जाए।
पृष्ठ 32 (इसे अनदेखा न करें)
प्रश्न : सूर्य से वर्षा क्यों होती है? क्या आप इसका कारण सोच सकते है?
उत्तर – सूर्य की ऊष्मा से जल वाष्पित होकर बादल बनता है और वही बादल वर्षा के रूप में पृथ्वी पर जल बरसाता है। इस प्रकार सूर्य ही वर्षा का मूल कारण है।
प्रश्न : यहाँ मध्य प्रदेश में एक नगर के तापमान को एक तालिका द्वारा प्रस्तुत किया गया है। सप्ताह में अधिकतम और न्यूनतम तापमान कितना है? ताप सीमा (रेंज) का आकलन कीजिए।
| दिनांक | अधिकतम तापमान (सेल्सियस) | न्यूनतम तापमान (सेल्सियस) |
| 28.02.2025 | 29 | 16 |
| 01.03.2025 | 30 | 15 |
| 02.03.2025 | 31 | 17 |
| 03.03.2025 | 32 | 18 |
| 04.03.2025 | 30 | 17 |
| 05.03.2025 | 28 | 14 |
| 06.03.2025 | 29 | 15 |
उत्तर – सप्ताह में अधिकतम तापमान 03.03.2025 को 320 सेल्सियस है। सप्ताह में न्यूनतम तापमान 05.03.2025 को 140 सेल्सियस है।
ताप सीमा (रेंज) = अधिकतम तापमान – न्यूनतम तापमान
= 320C – 140C = 180C
अतः ताप सीमा (रेंज) 180 सेल्सियस है।
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प्रश्न : आपके अनुसार वायुमंडलीय दाब को मापना क्यों महत्वपूर्ण है? वे कौन हैं जिन्हें इस प्रकार के मापनों की सर्वाधिक आवश्यकता होती है?
उत्तर – वायुमंडलीय दाब को मापना मौसम की भविष्यवाणी करने, उच्च स्थानों पर होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचने, सरकारी और मौसम विज्ञान अध्ययन करने, प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी देने आदि कारणों से महत्वपूर्ण है। वायुमंडलीय दाब के मापन की सर्वाधिक आवश्यकता मौसम विज्ञानियों, पर्वतारोहियों, पायलटों जलवायु शोधकर्ताओं, आपातकालीन शोधकर्ताओं आदि को होती है।
पृष्ठ 36 (आइए विचार करें)
प्रश्न : क्या आपने बीजों को इस प्रकार से पवन में उड़ते देखा है? अगर पवन न होती तो इन बीजों का क्या होता?
उत्तर – यदि पवन नहीं होती तो बीजों का फैलाव बहुत सीमित हो जाता। पवन बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का प्रमुख माध्यम है। जिसे भौगोलिक भाषा में वायु प्रकीर्णन कहते हैं।
प्रमुख प्रभाव –
- बीजों का सीमित फैलाव
- नई प्रजातियों का विकास न होना
- पारिस्थितिक संतुलन
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प्रश्न : कोच्चि और जयपुर में कहाँ अधिक आर्द्रता होने की संभावना है? इसके बारे में आप क्या सोचते हैं? आप अनुमान लगा सकते हैं कि समुद्र के निकट होने के कारण कोच्चि में जयपुर की तुलना में अधिक आर्द्रता होगी। किंतु हम निश्चित रूप से इसे कैसे जान सकते हैं? यदि हमें कोच्चि और मंगलुरू के बीच आर्द्रता की तुलना करनी हो, तो हम यह कैसे करेंगे? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर – कोच्चि और जयपुर की तुलना करने पर स्पष्ट है कि कोच्चि की आर्द्रता अधिक है, क्योंकि यह समुद्र के निकट अवस्थित है। इसके अतिरिक्त कोच्चि और मंगलुरू के बीच आर्द्रता की तुलना करने और आर्द्रता को मापने हेतु हम आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) का प्रयोग करेंगे।
पृष्ठ 38 (आइए विचार करें)
प्रश्न : यदि दिल्ली में आर्द्रता 52 प्रतिशत और कोच्चि में 84 प्रतिशत हो, तो दोनों स्थानों में से कहाँ गीले कपड़ों के जल्दी सूखने की संभावना है? यदि दोनों स्थानों पर तापमान समान है, तो कहाँ आपको अधिक पसीना आने की संभावना है?
उत्तर – दिल्ली में गीले कपड़े जल्दी सूख जाते हैं, क्योंकि वहाँ नमी कम होती है। कोच्चि में हमें पसीना आने की संभावना होती है, क्योंकि वहाँ की हवा पहले से ही नमी से भरी होती है और पसीना आसानी से नहीं सूखता।
पाठ्यक्रम के प्रश्न और क्रियाकलाप
प्रश्न 1. मौसम के तत्वों का उनको मापने वाले उपकरणों के साथ मिलान कीजिए –
| प्रयुक्त उपकरण | मौसम के तत्व |
| आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) | (क) वर्षण (प्रेसिपिटेशन) |
| पवन वेगमापी (एनीमोमीटर) | (ख) वायुमंडलीय दबाव |
| वायुदाबमापी (बैरोमीटर) | (ग) वायु की दिशा और गति |
| तापमापी (थर्मामीटर) | (घ) आर्द्रता |
| वर्षामापी (रेन गेज) | (ड) तापमान |
उत्तर – (1) – (घ), (2) – (ग), (3) – (ख), (4) – (ड), (5) – (क) ।
प्रश्न 2. ज्योत्सना यह सोच रही है कि जून में मुंबई में अपनी विद्यायल यात्रा के समय कौन-से कपड़े साथ ले जाए। वह मौसम के पुर्वानुमान को देखती है, जो 29 डिग्री सेल्सियस और 84 प्रतिशत आर्द्रता की भविष्यवाणी करता है। आप उसको क्या सलाह देंगे?
उत्तर – जून में मुंबई में मौसम गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है। ज्योत्सना को हल्के और आरामदायक कपड़े साथ रखने चाहिए। उसे अपने साथ छाता या रेनकोट भी रखना चाहिए, क्योंकि जून में मुंबई में मानसून का मौसम होता है।
प्रश्न 3. कल्पना कीजिए कि आपका एक छोटा समूह वर्षामापी यंत्र स्थापित कर रहा है। यहाँ उसे स्थापित करने के स्थान के कुछ विकल्प दिए गए हैं –
- विद्यालय का सब्जी उद्यान।
- विद्यालय भवन की छत।
- ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान।
- विद्यालय परिसर की दीवार।
- विद्यालय प्रयोगशाला का बरामदा।
अपने समूह के साथ चर्चा कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त स्थान का निर्धारण कीजिए। अपने निर्णय के कारणों को लिखिए।
उत्तर – वर्षामापी यंत्र स्थापित करने का सबसे अच्छा विकल्प है – “ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान।” खुला मैदान यह सुनिश्चित करता है कि पेड़ों या किसी अन्य संरचना से वर्षामापी प्रभावित न हो तथा ऊँचा चबूतरा यह सुनिश्चित करता है कि वर्षामापी जमीन से ऊपर रहे। यह मिट्टी के कणों को वर्षा माप में बाधा डालने से रोकता है।
प्रश्न 4. नीचे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, जम्मू और कश्मीर से ली गई एक सारणी है। उपलब्ध आँकड़ों को देखते हुए, दिखाए गए दिन को, जम्मू और कश्मीर के विभिन्न भागों में मौसम की स्थिति को दर्ज करने हेतु एक लघु आलेख लिखिए। (संकेत – ताप सीमा, अधिकतम और न्यूनतम तापमान, आर्द्रता, वर्षा आदि को सम्मिलित करें।) मौसम को समझना अध्याय 2
दैनिक मौसम मापदंड
जम्मू और कश्मीर (सांयकाल)
दिनांक : 01.02.2024
| केंद्र | दिनांक का अधिकतम तापमान | दिनांक का न्यूनतम तापमान | 8:30 बजे से 17:30 बजे तक (मि.मी./से.मी.) | 24 घंटे में 8:30 बजे तक होने वाली वर्षा की मात्रा (मि.मी./से.मी.)दिनांक को | सापेक्षित आर्द्रता | |||||||
| ACT (0C) | NOR (0C) | DEP (0C) | ACT (0C) | NOR (0C) | DEP (0C) | R/F (mm) | S/N (cm) | R/F | S/N | 0830 (%) | 1730 (%) | |
| श्रीनगर | 6.5 | 8.9 | -2.4 | 0.2 | -0.7 | 0.9 | TR | 0.0 | 13.4 | 2.4 | 89 | 89 |
| काजीगुंड | 3.2 | 8.5 | -5.3 | -0.4 | -2.1 | 1.7 | 11.8 | 10.0 | 36.2 | 22.0 | 97 | 90 |
| पहलगाम | 1.1 | 5.6 | -4.5 | -4.1 | -6.1 | 2.0 | 6.0 | 8.0 | 19.4 | 23.0 | 96 | 96 |
| कुपवाड़ा | 5.1 | 8.5 | -3.4 | -0.7 | -2.3 | 1.6 | 0.5 | 0.0 | 21.9 | 10.0 | 97 | 94 |
| कुकेरंग | 2.6 | 6.6 | -4.0 | -1.4 | -2.4 | 1.0 | 12.0 | 8.0 | 35.2 | 30.0 | 96 | 97 |
| गुलमर्ग | -2.6 | 1.4 | -4.0 | -7.6 | -7.6 | 0.0 | 8.2 | 6.35 | 35.2 | 35.0 | 76 | 100 |
| मुजफ्फराबाद | 8.5 | – | – | 5.6 | – | – | – | – | 25.8 | – | ९३ | – |
ध्यान दें – ACT (एक्चुअल अर्थात् वास्तविक), NOR (नॉर्मल अर्थात् सामान्य), DEP (डिपार्चर अर्थात् सामान्य से हटकर), R/F (रेनफॉल अर्थात् वृष्टि), S/N (स्नोफॉल अर्थात् हिमपात),TR (ट्रेस अमाउंट अर्थात् वर्षण की माप)।
उत्तर – जम्मू और कश्मीर के आँकड़ों के आधार पर मौसम रिपोर्ट (दिनांक : 01.02.2024)
- श्रीनगर – तापमान -अधिकतम 6.50C व न्यूनतम 0.20C, हल्की वर्षा, 89% आर्द्रता।
- काजीगुंड – तापमान -अधिकतम 3.20C व न्यूनतम -0.40C, बहुत ठण्डा, 11.8 मिमी. वर्षा, 97% आर्द्रता।
- पहलगाम – तापमान -अधिकतम 1.10C व न्यूनतम -4.10C, बहुत ठण्डा, 6.0 मिमी. वर्षा, 23 सेमी. हिमपात, 96% आर्द्रता।
- कुपवाड़ा – तापमान -अधिकतम 5.10C व न्यूनतम -0.70C, हल्की वर्षा, 10 सेमी. हिमपात, 97% आर्द्रता।
- कुकेरंग – तापमान -अधिकतम 1.10C व न्यूनतम -4.10C, बहुत ठण्डा, 6.0 मिमी. वर्षा, 23 सेमी. हिमपात, 96% आर्द्रता।
- गुलमर्ग – तापमान -अधिकतम -2.60C व न्यूनतम -7.60C, 8.2 मिमी. वर्षा, 35 सेमी. हिमपात, 76% आर्द्रता।
- मुजफ्फराबाद – तापमान -अधिकतम 8.50C व न्यूनतम -5.60C, 93% आर्द्रता।
मौसम को समझना अध्याय 2 FAQ’s
उत्तर: किसी स्थान पर किसी निश्चित समय में वायुमंडल की स्थिति (जैसे तापमान, वर्षा, हवा आदि) को मौसम कहते हैं।
उत्तर: मौसम की जानकारी मौसम विभाग द्वारा उपकरणों और उपग्रहों की मदद से प्राप्त की जाती है।
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