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विज्ञान कक्षा 8 मॉडल पेपर

विज्ञान कक्षा 8 मॉडल पेपर | RSCERT नमूना प्रश्न पत्र

इस लेख में हम राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, उदयपुर द्वारा जारी विज्ञान कक्षा 8 मॉडल पेपर हल करेंगे। हम यहाँ सभी प्रश्नों को हल कर रहे हैं ताकि आपको सम्पूर्ण प्रश्न पत्र आसानी से समझा जा सके। विज्ञान कक्षा 8 मॉडल पेपर

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, उदयपुर

प्रारम्भिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण पत्र परीक्षा – 2026

Table of Contents

कक्षा – 8

विषय – हिंदी

नमूना प्रश्न पत्र

समय : 2:30 घंटे                                                                         पूर्णांक – 80

खण्ड  – अ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (प्र.क्र. 1 से 8)

(अ) स्ट्रेप्टोमाइसिन                       (ब) राइजोबियम

(स) टेट्रासाइक्लिन                      (द) एरिथ्रोसमाइसिन                   (   )

उत्तर – (ब) राइजोबियम

(अ) वनस्पति जात                      (ब) प्राणिजात

(स) विशेष क्षेत्री स्पीशीज            (द) जैव मण्डल                          (   )

उत्तर – (स) विशेष क्षेत्री स्पीशीज

(अ) चाँदी                                  (ब) ताम्बा

(स) क्रोमियम                             (द) लोहा                                   (   )

उत्तर – (स) क्रोमियम

(अ) भूसम्पर्कण                           (ब) विद्युत विसर्जन

(स) आवेशन                              (द) तड़ित चालक                       (   )

उत्तर – (अ) भूसम्पर्कण

(अ) पाश्चरीकरण                        (ब) खाद्य विषाक्तन

(स) प्रतिरक्षण                            (द) संक्रमण                               (   )

उत्तर – (अ) पाश्चरीकरण

(अ) पेट्रोल डालना                      (ब) एल्कोहल डालना

(स) डीजल डालना                      (द) कम्बल से ढकना                  (   )

उत्तर – (द) कम्बल से ढकना

(अ) यह अधिक महँगा है।

(ब) इसमें अधिक ध्यान की आवश्यकता होती है।

(स) यह अधिक अवधि तक कार्य करता है।

(द) यह सुन्दर होता है।                                                                (   )

उत्तर – (स) यह अधिक अवधि तक कार्य करता है।

(अ) केवल कथन 1 सत्य है।

(ब) केवल कथन 2 सत्य है।

(स) कथन 1 एवं 2 दोनों सत्य हैं।

(द) कथन 1 एवं 2 दोनों असत्य हैं।                                        (   )

उत्तर – (स) कथन 1 एवं 2 दोनों सत्य हैं।

उत्तर – (1) मोटर ईंधन के रूप में प्रयुक्त।

(2) शुष्क धुलाई के लिए विलायक के रूप में प्रयुक्त।

उत्तर – वे जन्तु जो अंडे देते हैं अंडप्रजक जन्तु कहलाते हैं जबकि वे जंतु जो सीधे ही शिशु को जन्म देते हैं, जरायुज कहलाते हैं।

उत्तर – (1) छिड़काव तंत्र, (2) ड्रिप तंत्र।

उत्तर – ट्रेक्टर के टायरों में अधिक बड़े खाँचे रखे जाते हैं ताकि सड़क से उनकी पकड़ अच्छी बन सके।

(i) मृत वनस्पति के धीमे प्रक्रम द्वारा कोयले में परिवर्तन को परिष्करण कहते हैं। [   ]

(ii) LPG गैस का उपयोग घरों और उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जाता है। [   ]

(iii) पेट्रोल/डीजल बचाने के लिए गाड़ी बहुत तेज चलानी चाहिए। [   ]

(iv) पेट्रोल के विभिन्न संघटकों को पृथक करना कार्बनीकरण कहलाता है। [   ]

उत्तर – (i) असत्य, (ii) सत्य, (iii) असत्य, (iv) असत्य

(i) 2, 4-D एक ………….. है।  (उर्वरक/खरपतवारनाशी)

(ii) ……….. तथा ……….. कृषि औजार हैं। (कुदाली/सीड ड्रिल/उर्वरक)

(iii) खाद की अपेक्षा उर्वरक में जल धारण क्षमता ………… होती है। (कम/अधिक)

(iv) मिट्टी में पोषकों की पूर्ति ……….. द्वारा की जाती है। (सिंचाई/फसल चक्र)

उत्तर – (i) खरपतवारनाशी,

(ii) कुदाली, सीड ड्रिल,

(iii) कम,

(iv) फसल चक्र

उत्तर – वायु मण्डल में सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड वर्षा जल में घुल जाते हैं तथा अम्ल बनाते हैं। ऐसी वर्षा अम्ल वर्षा कहलाती है जो फसलों एवं भवनों के लिए हानिकारक होती है।

उत्तर – मोमबत्ती एवं कोयले के जलने में मुख्य अन्तर यह है कि मोमबत्ती ज्वाला के साथ जलती है जबकि कोयला नहीं।दहन के समय जो पदार्थ वाष्पित होते हैं वे ज्वाला का निर्माण करते हैं। पिघली हुई मोमबत्ती में ये मोमबत्ती के साथ-साथ ऊपर उठते हैं और दहन के समय वाष्पित होकर ज्वाला का निर्माण करते हैं।इसके विपरीत लकड़ी का कोयला वाष्पित नहीं होता और कोई ज्वाला नहीं होती।

उत्तर – गॉयटर रोग थायरॉयड ग्रंथि का रोग है। थायरॉयड ग्रंथि द्वारा जब थायरॉक्सिन हार्मोन का उत्पादन नहीं होता है तो गला बहुत फूला हुआ एवं उभरा हुआ दिखाई देता है जिसे गॉयटर रोग कहते हैं।

उत्तर – यौवनारम्भ में स्वरयंत्र अथवा लैरिंक्स में वृद्धि का प्रारम्भ होता है। लड़कों का स्वरयंत्र विकसित होकर अपेक्षाकृत बड़ा हो जाता है। इसके कारण लड़कों की आवाज भारी हो जाती है।

उत्तर – घर्षण बल एवं गुरुत्वाकर्षण बल में अन्तर –

घर्षण बलगुरुत्वाकर्षण बल
(i) यह सम्पर्क बल का उदाहरण है क्योंकि घर्षण बल दो सतहों के बीच सम्पर्क के कारण उत्पन्न होता है।(i) यह असम्पर्क बल का उदाहरण है क्योंकि इसमें दो वस्तुओं के बीच सम्पर्क आवश्यक नहीं है।
(ii) घर्षण बल सभी गतिशील वस्तुओं पर लगता है।(ii) गुरुत्व बल प्रत्येक वस्तु पर लगता है।

उत्तर – वायुमण्डलीय वायु पृथ्वी के तल से कई किलोमीटर ऊपर तक फैली हुई है। इस वायु द्वारा लगाए गए दाब को वायुमण्डलीय दाब कहते हैं। यदि हम एक इकाई क्षेत्रफल की कल्पना करें, और इसके ऊपर वायु से भरा एक लम्बा बेलन खड़ा हुआ मानें, तब इस बेलन में वायु पर लगने वाला गुरुत्व बल वायुमण्डलीय दाब के बराबर होगा।

वायुमंडलीय दाब

कॉलम – 1                         कॉलम – 2

(i) अमीबा                      (a) शिशु का जन्म

(ii) हाइड्रा                       (b) कायांतरण

(iii) मेंढ़क                        (c) द्विखंडन

(iv) जरायुज                     (d) मुकुलन

(e) परखनली शिशु

उत्तर – (i) – (c), (ii) – (d), (iii) – (b), (iv) – (a)

उत्तर – किसी काँच के गिलास या प्लास्टिक के कटोरे में एक प्याला आसुत जल भरते हैं। आसुत जल विद्युत का कुचालक होता है। इसमें नींबू के रस की कुछ बूँदें मिलाते हैं। अब इस विलयन में इलेक्ट्रोडों को डुबोते हैं।यह सुनिश्चित करते हैं कि कार्बन की छड़ों की धातु की टोपीयाँ जल से बाहर रहें। इलेक्ट्रोडों को ध्यानपूर्वक देखते हैं। इलेक्ट्रोडों के समीप गैस के बुलबुले दिखाई देने लगते हैं। ऐसा तभी हो सकता है जब इलेक्ट्रोडों द्वारा विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित होती हो। इससे सिद्ध होता है कि नींबू का रस विद्युत का चालक होता है।

उत्तर – ध्वनि संचरण का अवरोही क्रम – ठोस – द्रव – गैस – निर्वात।

उत्तर – जब भूकम्प आने पर हम घर के बाहर हो तो निम्न उपायों द्वारा अपना बचाव कर सकते हैं –

  • हमें किसी खुले स्थान की खोज चाहिए जो भवनों, वृक्षों तथा ऊपर जाती विद्युत लाइनों से दूर हो ताकि ये हमारे ऊपर ना गिर सकें।
  • यदि हम किसी कार या बस में हैं तो बाहर न निकलें ताकि क्षतिग्रस्त भवनों, वृक्षों आदि के सीधे सम्पर्क में आने से बच सकें। वाहन को धीरे – धीरे किसी खुले स्थान पर ले जाना चाहिए तथा भुस्पन्दन के समाप्त होने तक बाहर नहीं निकलना चाहिए।

उत्तर – आधुनिक जीवन में परावर्तन के सिद्धांतो का प्रयोग –

  • केश प्रसाधक की दुकान पर दर्पण द्वारा हम सिर के पीछे के बालों को आसानी से देख सकते हैं।
  • दो पर्पणों से परावर्तन पर आधारित परिदृश्यों का उपयोग पनडुब्बियों, टैंकों तथा बंकरों में छिपे सैनिकों द्वारा बाहर की वस्तुओं को देखने में किया जाता है।
  • परावर्तन पर आधारित बहुमुर्तिदर्शी (कैलाइडोस्कोप) द्वारा भाँति – भाँति के आकर्षक पैटर्न बनाने के लिए किया जाता है।
  • उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों में पश्च दृश्य दर्पण के रूप में किया जाता है।

आधुनिक जीवन में अपवर्तन के सिद्धांतों का प्रयोग –

  • दूरदर्शी एवं सूक्ष्मदर्शी का निर्माण लैंसों द्वारा प्रकाश के अपवर्तन पर आधारित है।
  • नेत्रों के दूर दृष्टि दोष एवं निकट दृष्टि दोष के निवारण हेतु लैंसों का उपयोग, प्रकाश के अपवर्तन पर आधारित है।

उत्तर – यदि बल बराबर हो तो पृष्ठ का क्षेत्रफल जितना कम होगा उस पर दबाव उतना ही अधिक होगा। कील के नुकीले सिरे का क्षेत्रफल इसके शीर्ष के अपेक्षा बहुत कम है। इसलिए वही बल कील के नुकीले सिरे को लकड़ी के तख्ते में ठोकने के लिए पर्याप्त दाब उत्पन्न कर देता है। लेकिन यदि कील के नुकीले भाग को चपटा बना दिया जाए तो इसका क्षेत्रफल बढ़ जाएगा और वही बल कील को तख्ते में ठोकने के लिए पर्याप्त दाब उत्पन्न नहीं कर पाएगा।

उत्तर – वायु अत्यंत हल्की तथा विरल होती है। फिर भी इससे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर वायु घर्षण बल लगाती है।इसलिए जब वस्तुएँ वायु में गति करती हैं तो उन्हें उन पर लगे घर्षण बल पर पार पाना होता है। इस प्रक्रिया में उनकी ऊर्जा का क्षय होता है। अतः घर्षण को कम से कम करने के लिए प्रयास किए जाते हैं। इसके लिए वस्तुओं को विशिष्ट आकृतियाँ दी जाती हैं।पक्षियों के शरीर का विकास इस प्रकार हुआ होगा कि वायु में गति करते समय घर्षण पर पार पाने में उनकी ऊर्जा का क्षय यथासंभव कम हो। इसीलिए वायुयान की आकृति पक्षी के समान बनाई जाती है ताकि घर्षण कम हो जाए।

उत्तर – मानव कर्ण (कान) का नामांकित चित्र

उत्तर – (i) एक स्थिर कार के पीछे एक आदमी खड़ा है। उसकी उपस्थिति से कार में गति नहीं आती है। लेकिन जब आदमी कार को धक्का लगाना प्रारम्भ करता है अर्थात् वह इस पर बल लगाता है तो कार लगाए गए बल की दिशा में गति करना प्रारम्भ कर सकती है, कार को गति देने के लिए आदमी को इसे धक्का लगाते रहना होगा।

इन उदाहरणों से हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि बल लगने के लिए कम से कम दो वस्तुओं में अन्योन्य क्रिया होनी आवश्यक है।

उत्तर – यदि घर्षण न हो तो हम पेन अथवा पेंसिल से नहीं लिख सकते। जब चाक से श्यामपट्ट पर लिखते हैं तो श्यामपट्ट का रूक्ष पृष्ठ रगड़ द्वारा चाक के कुछ कणों को उतार देता है जो श्यामपट्ट से चिपक जाते हैं और इस प्रकार श्यामपट्ट पर लिखावट दिखाई देती है। यदि सड़क तथा वाहन के टायरों के बीच घर्षण न हो तो उन वाहनों की न तो गति आरम्भ की जा सकती है, न ही उन्हें रोका जा सकता है और न ही दिशा परिवर्तित की जा सकती है। इन उदाहरणों से सिद्ध होता है कि घर्षण हमारा मित्र है।

उत्तर – (i) ऊँची आवाज में चलाए गए टेलीविजन, ट्रांजिस्टर, रेडियो और लाउडस्पीकर ध्वनि प्रदूषण करते हैं।

(ii) स्वचालित वाहनों के हॉर्न द्वारा उत्पन्न ध्वनियाँ ध्वनि प्रदूषण करती हैं।

उत्तर – हम अक्सर बड़ी मात्रा में मृत जीवों को, सड़ते हुए पादप व कभी-कभी सड़ते हुए जंतुओं के रूप में देखते हैं। हम देखते हैं कि कुछ समय बाद वह विलुप्त हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण है कि सूक्ष्मजीव, मृत जैविक अवशिष्ट का अपघटन करके उन्हें सरल पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं। यह पदार्थ अन्य पौधों एवं जंतुओं द्वारा पुनः उपयोग कर लिए जाते हैं। इस प्रकार हानिकारक एवं दुर्गन्धयुक्त पदार्थों का निम्नीकरण करने के लिए हम सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके पर्यावरण का शुद्धिकरण कर सकते हैं।

उत्तर – जब सभी समान्तर किरणें किसी खुरदरे या अनियमित पृष्ठ से परावर्तित होने के पश्चात् समांतर नहीं होती, तो ऐसे परावर्तन को विसरित परावर्तन कहते हैं। विसरित परावर्तन में भी परावर्तन के नियमों का पालन होता है।

नियमित व विसरित परावर्तन

इसके विपरीत दर्पण जैसे चिकने पृष्ठ से होने वाले परावर्तन को नियमित परावर्तन कहते हैं। नियमित परावर्तन द्वारा प्रतिबिंब बनते हैं।

उत्तर – राइजोबियम जीवाणु लैग्यूम पौधों की ग्रंथियों में रहते हैं। ये जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर उन्हें नाइट्रोजन यौगिकों में परिवर्तित कर देते हैं जिनका उपयोग पौधों द्वारा प्रोटीन एवं अन्य यौगिकों के संश्लेषण में किया जाता है। पौधों एवं जंतुओं की मृत्यु के बाद, मिट्टी में उपस्थित जीवाणु एवं कवक नाइट्रोजनी अपशिष्ट को नाइट्रोजनी यौगिकों में परिवर्तित कर देते हैं। कुछ विशिष्ट विनाइट्रीकरण जीवाणु नाइट्रोजनी यौगिकों को नाइट्रोजन गैस में परिवर्तित कर देते हैं जो वायुमंडल में चली जाती है। इस प्रकार राइजोबियम जीवाणु एवं विनाइट्रीकरण जीवाणु परस्पर विपरीत कार्य करते हैं।

उत्तर – परितारिका नेत्र का वह भाग है जो इसे इसका विशिष्ट रंग प्रदान करती है। पुतली के आकार को परितारिका से नियंत्रित किया जाता है। इस प्रकार परितारिका नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है।

पुतली के पीछे एक लेंस होता है जो प्रकाश को आँख के पीछे एक परत पर फोकसित करता है। इस परत को दृष्टिपटल (रेटिना) कहते हैं। दृष्टि पटल अनेक तंत्रिका कोशिकाओं का बना होता है। तंत्रिका कोशिकाओं द्वारा अनुभव की गई संवेदनाओं को दृक् तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचा दिया जाता है। इस प्रकार मानव नेत्र की संरचना में परितारिका एवं दृष्टि पटल की अवस्थिति देखने के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण है।

उत्तर – जैव मण्डल आरक्षित क्षेत्र में वाहन चलाते समय हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  • सभी यातायात संकेतों और नियमों का पालन करना चाहिए।
  • धीमी गति से वाहन चलाना चाहिए तथा स्थिर गति बनाए रखनी चाहिए।
  • अचानक ब्रेक लगाने या तेज गति से वाहन चलाने से बचना चाहिए।
  • वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
  • लो बीम हेडलाइटस का उपयोग करना चाहिए ताकि वन्य – जीव चौंकें नहीं।
  • अनावश्यक शोर उत्पन्न करने से बचना चाहिए।
  • निश्चित सड़कों एवं रास्तों को छोड़कर अन्य रास्तों पर वाहन ले जाने से बचना चाहिए।
  • वाहन से अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
  • वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करना चाहिए।

उत्तर – मानव अन्तःस्रावी ग्रंथि –

मानव में अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ

उत्तर – वन्य जीव अभयारण्य के भ्रमण की रूपरेखा –

  • पूर्व तैयारी – वन्यजीव अभयारण्य के सम्बन्ध में आवश्यक नियमों की जानकारी प्राप्त करना जैसे प्रवेश व लौटने का समय, निश्चित रास्ते, फोटोग्राफी सम्बन्धी नियम आदि।
  • आवश्यक सामान – ढीले, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल रंगों (जैसे भूरा, हरा) के कपड़े पहनना चाहिए। आरामदायक बैकपैक प्रयुक्त करना, अच्छी गुणवत्ता वाला कैमरा एवं दूरबीन साथ ले जानी चाहिए। प्राथमिक चिकित्सा किट, टॉर्च आदि साथ रखनी चाहिए।
  • अभयारण्य में व्यवहार और सुरक्षा – हमेशा नियमों का पालन करना और गाइड के निर्देशों को मानना चाहिए। वन्य जीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। सुरक्षा कारणों से अनावश्यक वाहन से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अनावश्यक शोर करने से बचना चाहिए।
  • पर्यावरण संरक्षण – किसी भी वनस्पति या पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। कचरा वाहन में रखे कूड़ेदान में ही डालना चाहिए, बाहर नहीं फेंकना चाहिए।

उत्तर – संतुलित आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन एवं खनिज का पर्याप्त मात्रा में समावेश होता है। रोटी, चावल, दाल एवं सब्जियाँ एक संतुलित आहार है। दूध व इससे बने उत्पाद अपने आप में संतुलित भोजन है। फल भी पर्याप्त पोषक होते हैं। लोह – प्रचुर खाद्य जैसे कि पत्तीदार सब्जियाँ, गुड़, संतरा, आँवला इत्यादि किशोर के लिए अच्छे खाद्य हैं।

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